
दहल गया दिल देख कर,दिल्ली की तस्वीर |
वीभत्स अग्नि कांड से,टूटा सबका धीर ||
टूटा सबका धीर,संकट बड़ा गहराया |
बहे नयन से नीर,किसी को समझ न आया ||
कहते कवि “संतोष”,करें अब जांच की पहल |
बढ़े न जन आक्रोश,शहर फिर न जाए दहल ||
संतोष नेमा “संतोष”

दहल गया दिल देख कर,दिल्ली की तस्वीर |
वीभत्स अग्नि कांड से,टूटा सबका धीर ||
टूटा सबका धीर,संकट बड़ा गहराया |
बहे नयन से नीर,किसी को समझ न आया ||
कहते कवि “संतोष”,करें अब जांच की पहल |
बढ़े न जन आक्रोश,शहर फिर न जाए दहल ||
संतोष नेमा “संतोष”