
आज विश्व में अमीर ग़रीब का
फ़ासला बहुत बढ़ता जा रहा है,
अमीर और अमीर होता जा रहा,
ग़रीब और गरीब होता जा रहा है।
भौतिकतावाद की प्रवृत्ति विश्व में
आध्यात्मिकता के ऊपर हावी है,
नैतिकता ध्वस्त होती जा रही है,
अविवेक से सारा समाज ग्रस्त है।
पैसा पैसे को आकर्षित करता है,
यह एक बहुत पुरानी कहावत है,
पर अनैतिक और अधर्म के द्वारा
धनार्जन से तो भ्रष्टाचार बढ़ता है।
वाणिज्य व्यापार में ईमानदारी
का सिद्धांत स्थापित रहा है,
परंतु वर्तमान में ईमानदारी का
स्थान बेईमानी ने ले लिया है।
आदित्य विश्वगुरु भारत भी इस
प्रवृत्ति से बिल्कुल अछूता नहीं है,
सनातनी देश भारतवर्ष में अधर्म से
धन कमाने की प्रवृत्ति बढ़ रही है।
डा० कर्नल आदि शंकर मिश्र
‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’
‘विद्यासागर’, लखनऊ













