
ज़मीन की ख़ातिर जिसने हर सितम गवारा किया,
हक़ और इंसाफ़ का जिसने उजाला किया।
जंगल की ख़ामोशी को आवाज़ देने वाला,
वो बिरसा था जिसने ज़ुल्म से किनारा किया।
ग़ुलामी की ज़ंजीरों से टकराने का हौसला,
कौम को बख़्शा उसने आज़ादी का फ़लसफ़ा।
उसकी यादों की रौशनी आज भी ज़िन्दा है,
हर दिल में उसकी मोहब्बत का सिलसिला है।
सलाम उस रहबर को, सलाम उस शख़्सियत को,
जिसने वतन की मिट्टी को सज्दा किया।
बिरसा मुंडा का पैग़ाम सदा ये कहता है—
हक़ की राह पर चलो, यही अस्ल ज़िया है।
बिरसा मुंडा जयंती की ख़िराज-ए-अक़ीदत। 🌿✨
श्री ठाकुर देवघर झारखण्ड













