
काफिया —- अर की बंदिश
रदीफ—- देखो।
बहर— 222—222—22=16
खुश हूँ आज बताकर देखो,
मधुवन में तो आकर देखो।
समय यही आया मिल कान्हा,
दिल में अपने रखकर देखो।
श्याम मिलेंगे भावों में ही,
प्रेम -सुधा छलकाकर देखो।
जन्मदिवस के शुभ अवसर पर,
दीपक प्रेम जलाकर देखो
राधे-श्याम कृपा बरसेगी,
मन का दर्प मिटाकर देखो।
वंशी की मृदु तान पुकारे,
खुद को तनिक भुलाकर देखो।
सुरभि यही कहती है तुमसे,
प्रभु को मीत बनाकर देखो।
डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार








