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जो करता है नित हरि वंदन

दया दृष्टि जिस पर हरि करते,जीवन हो जाता है कुंदन।
उसकी बिगड़ी शीघ्र बनाते,जो करता है नित हरि वंदन।।

सुबह शाम नित नाम जाप कर,
जो पूजा हरि की करता है।
संकट उसके पास न आता,
मस्त-मगन हरदम रहता है।

आँखों में अश्रु कभी न आते,दुख में करता कभी न क्रंदन।
उसकी बिगड़ी शीघ्र बनाते, जो करता है नित हरि वंदन।।

सुबह-शाम हरि ध्यान लगाता,
प्रभु के सम्मुख शीश झुकाता।
निर्मल गंगा जल से हरि को,
प्रेम पूर्वक नित नहलाता।

कट जातीं बाधाएं सारी,जीवन महके जैसे चंदन।
उसकी बिगड़ी शीघ्र बनाते, जो करता है नित हरि वंदन।।

धूप दीप नैवेद्य चढ़ाता,
फल मेवे का भोग लगाता।
मृदा कलश स्थापित कर घर में,
प्रेम पूर्वक पाठ कराता।

जो हरि को निज व्यथा सुनाता,उसके दुख हरते भवभंजन।
उसकी बिगड़ी शीघ्र बनाते,जो करता है नित हरि वंदन।।

जो हरि छवि को हृदय बसाता,
नहीं काल भी उसे डराता।
जिस पर करुणा करते श्री हरि,
शीघ्र सफलता वह नर पाता।

निकट कभी भी रोग न आता,काया हो जाती है कंचन।
उसकी बिगड़ी शीघ्र बनाते,जो करता है नित हरि वंदन।।

  राम जी तिवारी"राम"
  उन्नाव (उत्तर प्रदेश)

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