
।जिंदगी के कुछ महत्वपूर्ण बातें।
घर जाने का रास्ता न भूला हूँ साहेब भले बचपन में स्कूल न जाने का नसीब न हुआ
साहेब,क्योंकि पढने लिखने के समय में मजबूरी ने हाथों में झाड़ू पोंछा थमा दिया
है साहेब,न माता और न पिता का कोई गलती था और नहीं मेरा कोई गलती था
और नही मेरा नसीब खराब था साहेब,बस समय ही कुछ इस तरह का चल रहा था जो
चारों तरफ लाचारी था सरकारी स्कूल होतें हुए भी पढ न सका क्योंकि घर में भूखमरी
था बस इतनी सी कुछ कहानी है साहेब कुछ मजबूरी तो कुछ लाचारी है
चन्दे पासवान उर्फ अलबेला जी मधुबनी बिहार से,








