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बर्फ और अंगार

बर्फ और अंगार दोनों एक दूसरे के विपरीत शब्द हैं
एक जो शीतलता देता, दूसरा जलाता है
बर्फ और अंगार जो अक्सर जीवन के संघर्ष, प्रेम की तीव्रता और मानवीय भावनाओं के उतार-चढ़ाव को दर्शाते हैं
बर्फ की शीतलता, जो रूह को छू जाती है
अंगार -सी -तपन, जो ख्वाबों को पल भर में जला देता है
रिश्तों की डोर, इन्हीं के बीच टिकी है
हमारे जीवन में बर्फ की शीतलता
जीवन को कहां जीने देती है
अंगार की जलन बेहद तड़पाती है
पर जीवन को कभी मरने नहीं देती
बर्फ जीवन को सुख देती है तो अंगार दुःख देता है
बर्फ की शीतलता कभी मन को सुकून देती , प्रेम को बढ़ाती है
अंगार की जलन, दिल को जलाती है,
द्वेष को बढ़ाती है
अंगार की जलन दिल को दर्द देती है
सच, ये जीवन है अनमोल क्रांति
कभी जुनून की आंधी तो कभी विरह की शांति
अंगार की तरह जलता है चाहत
बर्फ सी ठंडी है कभी ये राहें
जलना है संभल -संभल कर

डॉ मीना कुमारी परिहार

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