
पवन सुत बलधाम अति,संकट हरन कृपाल।।
रामदूत रघुवर सखा,काटहु कष्टहि जाल।।
कंचन वदन तेजस्वी,अचल भक्ति आगार।
सीता खोजि लाए प्रभु,सागर लाँघ अपार।।
लंका कीन्हि दहन तुम,दानव दल संहार।
राम नाम रस पान कर, पायो भव निस्तार।।
गदा धरे कर में सदा, रक्षा कर हनुमान।
भक्त जनों के कष्ट हर, दियो सुखद वरदान।।
दाता बुद्धि विद्या के,तुम हो दीन दयाल।
शरणागत जो भक्त जन,करहु उसे खुशहाल।।
डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘ सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार











