
मोहन मदन मुरारी सुन लो,
गोवर्धन गिरधारी!
आया शरण तुम्हारे रसिया,
संकट हरलो सारी!!
भव बाधा से मुक्त रहूं मैं,
नटवर लीला धारी!
बालक तेरा हूं मनमोहन,
सुन लो अरज हमारी!!
स्वस्थ सुखी आनंदित जीवन,
स्मृतियाँ हों न्यारी!
‘जिज्ञासु’ पर ध्यान धरो अब,
कृपा करो गिरधारी!!
गूंज उठे धुन बंसी की नित,
सुबह शाम बनवारी!
आया शरण तुम्हारे रसिया,
संकट हर लो सारी!!
कमलेश विष्णु सिंह ‘जिज्ञासु’











