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बेटा मूल धन, पोता ब्याज धन

जिंदगी में आशाओं की किरण तुम हि हो,,,
मेरे पास कि जमा पूंजी निवेश तुम ही हो,,,,

जो सनसनी मचा दे वो उत्तेजित उत्पाद तुम हि हो,,,
आंखों का सुकून तुम हो,,,,,
दिल का चैन तुम हि हो,,,,

मूल कहो तो तुम और ब्याज कहो तो हि हो,,,,,
उधार कहो तो तुम, और कैश तुम हि हो,,,,

मेरा दम दमदार अभिनय तुम हो,
मेरा बचपन का पिछला छुटा किरदार तुम हि हो,,,,,
मैं भुल जाता हूं तुझे देख कर दुःख दर्द सारे,,,
हर मर्ज कि दवा चुरन तुम हि हो,,,,

घर कि आन, परिवार कि शान तुम हो,
मेरा मान सम्मान तुम हि हो,,,,

पिता – पुत्र का रिश्ता अधुरा सा लगता है जो जब-तक पोता पोती ने आ जाए,,,
बेटा बेटी तो मुल्यवान है हि। यह सब
मूल धन हैं तो,,,मेरा ब्याज धन तुम हि हो,,,,,,


अशोक कुमार

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