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अमर हैं पवनपुत्र हनुमान

हनुमान जी की महिमा है, विश्व में अपरंपार,
साक्षात अमर विराजते, पवनपुत्र बल-भंडार।

रामदूत अतुलित बलधामा, अंजनी के तुम लाल,
भक्ति, शक्ति और विनय के, जग में अनुपम मिसाल।

जिसने श्रद्धा से तुम्हें पुकारा, पाया सदा सहारा,
संकट हरकर सुख बरसाया, किया भवसागर पारा।

लंका जाकर जानकी माता को प्रभु का संदेश सुनाया,
रावण के अभिमान को तोड़, धर्म का दीप जलाया।

सागर लाँघा, गिरि उठाया, किया असंभव काम,
तन, मन, प्राण समर्पित कर सिद्ध किया श्रीराम का नाम।

संजीवनी लाकर तुमने लक्ष्मण को जीवनदान दिया,
सेवा, साहस और समर्पण का जग को अमृत ज्ञान दिया।

जहाँ गूँजे तुम्हारा नाम, मिट जाए हर भय-शोक,
भूत-पिशाच निकट न आवें, कट जाएँ सब रोग-वियोग।

कलियुग के जागृत देव हो, भक्तों के रखवाले,
दीन-दुखियों की लाज बचाते, कृपा-सिंधु मतवाले।

बल, बुद्धि, विद्या के दाता, संकटमोचन वीर,
तुम बिन कौन सहारा दे, हे कपीश्वर रणधीर।

रामभक्ति का दीप जलाकर, कर दो मन उजियार,
अहंकार और अज्ञान हर लो, दो जीवन को सार।

हे बजरंगबली! कृपा करो, भर दो मन में ज्ञान,
चरणों में नित शीश झुकाऊँ, यही रहे अरमान।

जय हनुमान ज्ञान-गुण सागर, जय कपीस तिहुँ लोक उजागर।
रामदूत अतुलित बलधामा, संकटमोचन मंगलधामा।

जय श्रीराम! जय हनुमान!
जय-जय बजरंगबली भगवान!

रूपेश कुमार
चैनपुर, सीवान, बिहार

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