बेटियों की मुस्कान से महका कल्पकथा का साहित्यिक आँगन, 266वीं काव्यगोष्ठी में गूँजा बेटी के सम्मान का स्वर

प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित, राष्ट्र प्रथम, हिन्दी भाषा, सनातन संस्कृति, एवं सद साहित्य हेतु कृत संकल्पित कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुत्री दिवस विशेष 266वीं साप्ताहिक ऑनलाइन काव्यगोष्ठी का आयोजन बेटियाँ विषय पर अत्यंत भावपूर्ण, संवेदनशील एवं साहित्यिक वातावरण में संपन्न हुआ। बेटी के वात्सल्य, ममता, स्नेह, त्याग, स्वप्न, संघर्ष और सामर्थ्य के विविध आयामों को केंद्र में रखकर आयोजित इस विशेष काव्यगोष्ठी में सृजनकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से पुत्री के रूप में जीवन में उतरने वाली उस आत्मीय रोशनी को शब्द दिए, जो परिवार को भावनात्मक समृद्धि प्रदान करती है।
संवाद प्रभारी ज्योति राघव सिंह की सूचना के अनुसार कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन भास्कर सिंह माणिक ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता दिनेश कुमार दुबे ने की, जबकि रमापति मौर्य ने मुख्य अतिथि का दायित्व संभाला।
कार्यक्रम का शुभारंभ विजय रघुनाथराव डांगे द्वारा प्रस्तुत संगीतमय गुरु वंदना, गणेश वंदना एवं सरस्वती वंदना से हुआ। मंगलाचरण की पावन स्वर-लहरियों के पश्चात काव्यधारा ने बेटी के विविध रूपों को अपनी भावाभिव्यक्ति में समेटते हुए मंच को वात्सल्य और संवेदना से भर दिया।
अमित पण्डा ‘अमिट रोशनाई’, हेमचंद्र सकलानी, डॉ. शरद नारायण खरे, अवधेश प्रसाद मिश्र ‘मधुप’, दिनेश कुमार दुबे, रमापति मौर्य, विजय रघुनाथराव डांगे, भास्कर सिंह माणिक,राधा श्री शर्मा एवं पवनेश मिश्र ने अपनी रचनात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से बेटी को परिवार की आत्मीय धुरी, संस्कारों की संवाहिका और स्नेह की जीवंत अभिव्यक्ति के रूप में चित्रित किया।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में राष्ट्रगीत वन्दे मातरम् का भावपूर्ण गायन किया गया। राष्ट्रगीत “वन्दे मातरम्” के 150वें स्मरणोत्सव वर्ष के संदर्भ में राष्ट्रगीत गायन ने भावनात्मक आयोजन को राष्ट्रचेतना से जोड़ते हुए गरिमामय परिणति प्रदान की।
इसके उपरांत राधा श्री शर्मा ने आमंत्रित अतिथियों, सहभागी साहित्यकारों एवं दर्शकों के प्रति हृदयपूर्ण आभार व्यक्त किया। अंत में सर्वे भवन्तु सुखिनः के मंगलमय शांति-पाठ के साथ 266वीं कल्पकथा साप्ताहिक ऑनलाइन काव्यगोष्ठी को विश्राम प्रदान किया गया।













