
ज्ञान का संसार तो अथाह है,
जिसका किसी ने ना पाया थाह है।
पहला ज्ञान संसार में माता -पिता से,
फिर गुरु से, साधु से, संतों से।
माता -पिता ने संसार में रहना सिखाया,
ज्ञान मिलता गुरु से, पुस्तकों से, रामायण,
गीता, महाभारत, भागवत पुराण से।
ज्ञान तो उन सभी चीजों से भी मिलती है, जिससे हम अनजान होते हैं।
काँटों में फूल का खिलना ज्ञान सिखाता है,
चट्टान से घिसती उस रस्सी से ज्ञान,
पेड़ पौधों को पकडे रखे उस मिट्टी से ज्ञान।
मीरा की भक्ति, भक्ति में शक्ति,
जिसने जहर की प्याली को अमृत बनाया।
राम के वचन, सीता सी तपस्या,
कृष्ण के वियोग में राधा की तपस्या।
यह ज्ञान केवल अक्षरों व शब्दों तक सिमित नहीं,
प्रेम, प्रतिज्ञा, संयोग, वियोग से परे नहीं।
चट्टान सी मजबूती, पेड़ -पौधों सी हरियाली,
झरनो और नदियों सा बहाव,
पक्षियों की उड़ान।
इन सभी को भी हमें प्रेरणा स्रोत बनाने चाहिए,
और इन्ही से हमारा ज्ञान का संसार ओत -प्रोत होना चाहिए।।
पूर्णपावन कृति
सरायपाली छत्तीसगढ़













