
हे मेरे भगवन ,, मेरे मालिक युहिं अपने संग में रखना,,,,,
मेरे उपवन,,गीरधारी, बनवारी,, ,,
मुझे तेरी पलकों पर बिठा कर रखना,,,
रंग रंग के लोग मिलते हैं यहां,,, मुझे तो श्याम रंग में हि रंग के रखना,,,
मैं आईना देखुं तो तुम नज़र आते हो,,
पानी में निहारता हुं तो,,
तुम दिखाई देते हो,,,, कैसी-कैसी बातें करते हैं लोग यहां के,,,
लोगों कि बातों से बचा कर रखना ,,,,,
अशोक सुमन,
भवानी मंडी ( राज. )













