
अमृत की तलाश मे भटकता है इंसान
मिल यदि अमृत तो,करेगे तुरंत पान
लेकिन अफसोस कि,दिखे नहिं कहीं अमृत
खोज खोज कर परेशानी मे है,इंसान ।
ये कलयुग है,हे इंसान इसे तुम मानो
पग पग मे जहर मिलेगे, ये तुम जानो
अमृत को तो ,भूल ही जाओ तुम यही
अमृत जैसा कुछ ना मिलेगा,ये तुम जानो।
और एक बात,अमृत पाकर भी क्या करोगे?
पीकर यदि तुम,अमर हो भी जाओगे
तो,पछतावा खूब तुम्हे खुद मे होगी
ये जालिम दुनिया,तुम्हे चैन से जीने न देगी ।
अतः ये अमृत के फेरे मे मत फंसो, इंसान
पोष्टिक भोजन का नित रखो, तुम ध्यान
तन,मन से रहोगे स्वस्थ और प्रसन्न
सोच लो अमृत जैसा,नित करते है पान ।
जो भी मिली है जिंदगी, ये धरा पर
उसका भले से तुम ,सदुपयोग कर
तेरे जाने के बाद,लोग तेरे रखेगे याद
मान लै,वही भले कार्य ही किया,अमृत कि असर।
चुन्नू साहा पाकुड़ झारखंड













