
स्वदेश की मिट्टी पुकार रही,आओ मेरा मान बढ़ाओ।
प्रेम, परिश्रम, साहस लेकर,भारत का भविष्य सजाओ॥
मैंने वीरों को जन्म दिया है,मैंने ऋषियों को पाला है।
मेरे कण-कण में गूँज रहा,बलिदानों का उजियाला है॥
जब हल चलता मेरे तन पर,सोना बनकर अन्न उगाती।
जब सीमा पर वीर खड़े हों,उनके चरणों में मुस्काती॥
स्वदेश की मिट्टी पुकार रही,आओ मेरा मान बढ़ाओ।
प्रेम, परिश्रम, साहस लेकर,भारत का भविष्य सजाओ॥
नदियाँ मेरा गीत सुनातीं,पर्वत मेरी शान बताते।
रंग-बिरंगे फूलों के संग,सपनों के दीपक जल जाते॥
जाति-धर्म का भेद भुलाकर,एक तिरंगे तले मिल जाएँ।
माँ की इस पावन धरती पर,प्रेम के सुंदर फूल खिलाएँ॥
जब तक सूरज-चाँद रहेंगे,तेरा यश हम गाते जाएँ।
स्वदेश की पावन मिट्टी का,ऋण हँसते-हँसते चुकाएँ॥
रीना पटले शिक्षिका
शासकीय हाई स्कूल ऐरमा कुरई
जिला सिवनी मध्यप्रदेश में












