
हम सब के तो प्राण तुम्हीं हो देने वाले त्राण तुम्हीं हो
गायत्री की मधुर साधना श्रद्धा प्रज्ञा कल्याण तुम्हीं हो
ज्ञान पाने को तेरे दर पे आए हैं
तेरे दर पे पुजारी बन के आए हैं
तूमने जलाया अखण्ड दीप जो बदल रहा है विश्व अपना
अज्ञानों का तिमिर मिट रहा सफल हो रहा हर सपना
आपके सपनों को साकार करने आए हैं
तेरे दर पे पुजारी बन के आए हैं
गुरूदेव की कृपा पाकर जीवन धन्य हुआ है
मां भगवती का स्नेह मिला तो मन कोमल हुआ है
युग धर्म निभाने का प्रण हम उठाए हैं
तेरे दर पे पुजारी बन के आए हैं
हवन यज्ञ की सूक्ष्म शक्ति से मिट रहा मन का अंधियारा
सफल हुआ युग निर्माण योजना हो रहा कण कण उजियारा
सद्भावों के फुल हम खिलाएं हैं
तेरे दर पे पुजारी बन के आए हैं
शांतिकुंज ही पूरे विश्व का अध्यात्मिक केन्द्र बना है
युग का विश्वामित्र यहीं हैं सबको एक दिन आना है
नवयुग का सन्देश देने हम आए हैं
तेरे दर पे पुजारी बन के आए हैं
जब भी कष्ट में हम हो जाते तेरे ही दर पर आते
तेरे नाम की माला लेकर, तुझको हर पल जपते
दिल के मंदिर में तुझको हम सजाए हैं
तेरे दर पे पुजारी बन के आए हैं
रवि भूषण वर्मा
राँची झारखंड












