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कृतज्ञता के पुष्प

हे प्रभु! तेरा हर पल मुझ पर अनुपम उपकार है।
तेरी कृपा से ही जीवन का सुंदर संसार है।

सूरज की हर स्वर्ण किरण का तुझको है शुक्रिया,
शीतल चंदा, नभ के तारों का भी है शुक्रिया।

श्वास-श्वास में बसती तेरी अमृतमयी छाया।
दुख में भी विश्वास दिया, सुख का दीप जलाया।

अन्न, जल और वायु मिली, तेरा ही उपहार,
हर मौसम में झलक रहा तेरा दिव्य सत्कार।

माता-पिता का स्नेह मिला, तेरा है आशीष।
गुरुओं से ज्ञान मिला, मिटा अज्ञान का विष।

सच्चे मित्र, अपना परिवार, सब तेरा वरदान,
तेरे कारण ही मिलता जीवन को सम्मान।

फूलों की मुस्कान तुझे, पंछी का मधुर गान।
हर धड़कन कहती रहती, तू ही मेरी जान।

विपदा में धैर्य दिया, संघर्षों में बल,
तेरे भरोसे कट गए जीवन के कठिन पल।

झोली मेरी छोटी है, कृपा तेरी अपार।
हर दिन तेरा नाम बने जीवन का आधार।

जो कुछ भी है पास मेरे, सब तेरा प्रसाद।
हे दीनदयाल! तुझको मेरा शत-शत प्रणाम।

हर पल, हर श्वास, हर खुशी का यही कहूँ उद्गार—
प्रभु! तेरी हर नेमत का हृदय से है शुक्रिया बारंबार।


डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार

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