
प्लास्टिक का क्यों इतना प्रयोग हो रहा है?
धरती पर क्यों इतना अन्याय हो रहा है।।
जिसका दुष्प्रभाव बढ़ता जा रहा है।
धरती का मानो गला घोंटा जा रहा है।।
लोग प्लास्टिक थैली खूब घरों में लाते,
आधे से ज्यादा कचरा प्लास्टिक है पाते।
प्रदूषण से क्या तुम परिचित नहीं हो?
अंधाधुंध उपयोग करते जा रहे हो।
धरती माँ बीमार है प्लास्टिक के बोझ से,
हम इसके गुनहगार है उबरेंगे कब लोभ से ?
पता नहीं कब भारत की ये तस्वीर बदलेगी?
प्लास्टिक मुक्त होके,धरती फिर से हंसेगी।।
क्या हम माँ की पीड़ा महसूस कर पाएँगे?
अपनी आँखों से प्रदूषण मुक्त देख पाएँगे?
काश!भारत के जन थोड़ा विचार कर ले,
कपड़े के थैले का हर जगह प्रयोग कर ले।।
प्लास्टिक को खाकर आवारा पशु न मरेंगे,
परती की उर्वरा शक्ति पालीथीन से कम न करेगे।।
अपनाये मंत्र स्वच्छता हो जाय इसमें महारत,
सचमुच बनेगा हमारा,प्लास्टिक मुक्त भारत।।
भगवान दास शर्मा “प्रशांत”
इटावा उत्तर प्रदेश













