
तूं हीं दिन और तूं हीं रात है रे कन्हैया
तूं हीं जग सारा कायानात है रे कन्हैया
बोलों हरे रामा बोलों हरे हरे
बोलों हरे कृष्णा बोलों हरे हरे
तीन पग में तीनों लोक माप लिया है
बोल रे कन्हैया तेरी कितनी बड़ी काया
तेरे दर पर सर झुकातें हैं सब छोटे बड़े
बोलों हरे रामा बोलों हरे हरे
तेरे मुख में तीनों लोक समाया है
बोल रे कन्हैया तेरी कैसी ये माया है
तेरे दर पर कोई छोटे है न कोई बड़े
बोलों हरे रामा बोलों हरे हरे
काया में कुंदन कान्हा तूं हीं रघुनंदन है
सौ सौ बार तुमको कान्हा मेरा अभिनंदन है
लिख रहा अलबेला तेरी कहानी बड़े बड़े
बोलों हरे रामा बोलों हरे हरे
चन्दे पासवान उर्फ़ अलबेला जी मधुबनी बिहार













