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प्रभाती वंदन के साथ चंद दोहा मुक्तक

द्वन्द्व देश में बढ़ रहा, युवा सभी गतिवान।
समझें नहीं महत्व को,करते पाप महान।
संस्कृति कैसे है बचे,इस पर करें विचार,
कृपा करो शनि देव जी, बदलो सकल विधान।।

विद्या बुद्धि अपार दें,सत्य सनातन सार।
भक्तों पर करके कृपा,करिए बेड़ा पार।
दुष्टों को संघारिए,मिले सुखद शुभ भोर,
सूर्य तनय विनती सुनो,वंदन है सत बार।।

सिंगणापुर शनि देव की, महिमा बड़ी महान।
ताले लगते घर नहीं, सबका है ईमान।
जो भी जाता है वहांँ, सुनते करुण पुकार,
सकल विश्व में गूंँजता, इनका है गुणगान।।

न्याय प्रदाता आप हैं, हम बालक नादान।
सब पर करते हैं कृपा, सबका रखते ध्यान।
कुण्ठाओं के भार का,सदा आप आलम्ब,
आर्तनाद सुन भक्त की, देते मुख मुस्कान।।

डॉ गीता पांडेय अपराजिता
सलोन रायबरेली उत्तर प्रदेश

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