
विधा -गीत
मैं बाबा की बिटिया हूँ,
सोन चिरैया हूँ।
आँगन की खुशबू हूँ,
बाबा का विश्वास हूँ,
घर की पुरवइया हूँ।
मैं बाबा की बिटिया हूँ,सोन चिरैया हूँ।
बाबा की उंगली थामे हुए मैं,
सपनों की राहों में चलती हूँ।
उनकी सीखों के दीपक लिए,
जीवन की ज्योति जलाती हूँ।
उनके मन की दर्पण हूँ,
उनकी परछाई हूँ।
मैं बाबा की बिटिया हूँ,सोन चिरैया हूँ
पंख मिले है सपनों के,
ऊंची उड़ान भरूंगी।
बाबा के अरमानों को,
एक दिन सच करूंगी।
उनकी आँखों का तारा हूँ,
हिम्मत की तरैया हूँ।
मैं बाबा की बिटिया हूँ, सोन चिरैया हूँ।
अनिता महेश पाणिग्राही
सरायपाली छत्तीसगढ़












