
बादल गरज रही है गड़ गड़,
बिजली चमक रही है।
फिर भी देखों किसान को,
खेतों में धान बों रहें हैं।
रिमझिम बारिश होती है,
आंधी तूफान चल रहा है।
फिर भी अपनी हिम्मत से,
किसान न पीछे हटतें हैं।
भूख प्यास का गम नहीं है
मरने का कोई डर नहीं है।
सबसे पहला धर्म है खेती,
मेहनत इनकी कम नहीं है।
चिंता में कटती है रात,
धान की खेती कैसे होगी
यहीं सोचते हैं किसान,
सुबह पहले उठ जाना होगा।
किसान अपने घर से पहले,
खेतों में चक्कर आतें हैं काट।
लेकर सिर पर धान का बोझा,
अपनी खेतों में करतें हैं बोआई।
चन्दे पासवान उर्फ अलबेला जी मधुबनी बिहार से,













