
ज्ञान का दीप जो जलता है,
जीवन-पथ तब खिलता है।
अज्ञान का हर तम मिट जाता,
जब शिक्षा का सूरज उगता है।
शिक्षा देती नई उड़ान,
बढ़ता इससे देश का मान।
सपनों को आकार यही दे,
बनती जीवन की पहचान।
किताबों में बस अक्षर नहीं,
अनुभव का संसार है।
शिक्षा से ही सच्चे अर्थों में,
मानवता का विस्तार है।
जो सीखने की राह चुने,
उसका हर दिन त्योहार बने।
ज्ञान, विनय और कर्म के संग,
जीवन सच्चा उपहार बने।
शिक्षा ही साहस का संबल,
शिक्षा ही मन का उजियारा।
इसके बल पर हर इंसान,
बन सकता है भाग्य सितारा।
शिक्षा से संस्कार मिलें,
सेवा का सच्चा भाव जगे।
अपने संग समाज भी बढ़े,
हर घर में विश्वास जगे।
आओ मिलकर प्रण ये लें,
ज्ञान की ज्योति जलाएँगे।
हर बच्चे तक शिक्षा पहुँचे,
ऐसा भारत बनाएँगे।
शिक्षा ही सबसे बड़ा धन है,
जिसे न कोई चुरा सकता है,
न बाँटने से घटता है;
बल्कि जितना बाँटो,
उतना ही बढ़ता जाता है।
रचनाकार: ओम कश्यप













