
नो महिने मां ने गर्भ में रख कर काया का निर्माण किया
खेल रचें है सब हमने मां की गोद में मां से दुध पान किया
बचपन में जब जी भरकर के ममता लुटाती है वो मां है
मां को पाया जो हमने,
जीवन को हमने धन्य किया
मां को चले जाने के बाद भी जीवन सुखमय हो कैसे हमने सिख लिया
उसके शिक्षा से ही हमने घर आंगन को मंदिर
किया
कठिनाई से कैसे बचा जाए
एक साथ रहना सिख लिया
सर्दियों गर्मी में रखें अपनी कुशल क्षेम,
नेतृत्व वाली यादों को सिख कर स्वीकार किया
आंगन की धूप को भी ललकार के उसने छांया इंतजाम किया
घर को मंदिर सी
पहचान बनाया
खुबसूरती का निर्माण किया,
शिक्षा को लेकर रोज़ाना हमारे भोजन के टिफिन का इंतजाम किया
संस्कार दिया,
परिवार दिया,
खुशियों भरा संसार दिया।।
इस धरती पर लाकर के हमको
हम पर बड़ा उपकार किया ।।
अशोक सुमन भवानी मंडी (राज.)













