
रिमझिम रिमझिम पानी बरसे,ठंडी चले बयार।
मस्ती भरा सावन आया, कर लो साजन प्यार।।
सुख में दुख में सारे जीवन,रहूंगी तेरे साथ।
साथ तेरा कभी न छोडूं।
करती हूं इकरार।।
अनछुई हूं रात की रानी।
बिखेरूं सुगंध बहार।
लूट सको जितना लूटो प्रिय, न करूगी इनकार।।
तुम ही सूरज चंदा मेरे,
तुम मेरे भरतार।
प्रीत जताकर तुमने साजन
जीना किया दुश्वार।।
ये वर्षा तो आग लगाऐ,
चढ़े तन पर ज्वार।
इस रोग की नही दवा कही,
तुम ही करो उपचार।।
गीतकार मनोहर सिंह चौहान मधुकर













