
खुशियों के हर पल मांगेंगे।
आज नहीं तो कल मांगेंगे।।
लालच के आंधे नहीं रुकेंगे।
खेत हड़पकर हल मांगेंगे।।
नदियों को मुट्ठी में भरकर।
प्यासों से यह जल मांगेंगे।।
तुमको लगता है हार जाएंगे
आकाओं से बल मांगेंगे।।
षड्यंत्रों को सेवा कहकर।
फूल चढ़ाकर फल मांगेंगे।।
मंदिर के यह चोर लुटेरे।
राम से अच्छा कल मानेंगे।।
‘विनीता’यह कलयुग के रावण।
वरदानों में छल मांगेंगे।।
विनीता धाकड़
बरेली -रायसेन मध्य प्रदेश













