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प्रभाती वंदन के साथ चंद दोहा मुक्तक

मंगलमय सबका हुआ, रक्षाबंधन पर पर्व।
जग में बड़ा अमूल्य है,जान रहे हैं सर्व।
रिश्ता शुचि भाई बहन,बरसे प्रीति अपार,
भाई जिनके पास हैं, उसको अतिशय गर्व।।

रूप सहज शनि देव का रिश्ता सबसे खास।
कर्मों के अनुरूप ही,फल का है इतिहास।
जो आता इनकी शरण, उसका बेड़ा पार,
पूजन सबजन मिल करो,उर में भर विश्वास।।

सतत साधना लीन हो, झुका रही निज माथ।
कृपा मिले शनि देव जी, सिर पर रखकर हाथ।
दूर करें सब कष्ट मम,भरें ज्ञान भंडार,
चरण-शरण में ठौर दे, करिए मुझे सनाथ।।

माता छाया रवि पिता, बना जगत में साज।
सिंगणापुर शुभ धाम में,नित शनिदेव विराज।
बड़े भाग्यशाली वहांँ,बसे हुए जो लोग,
जैसी उन पर है कृपा, वहीं मिले मम आज।।

डॉ गीता पांडेय अपराजिता
सलोन रायबरेली उत्तर प्रदेश

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