
अनुपम त्यौहार है राखी, भाई-बहन का निश्छल प्यार।
श्रावण पूर्णिमा का सब बहनों को रहता है इंतजार।।
रेशम के धागे से देखो जुड़ा हुआ है सबका पावन प्यार।
सजती है भाई की कलाई, जैसे छाई हो बसंत बहार।।
बेसब्री से सभी भाई करते है रक्षा बंधन का इंतजार।
बहिनें आती है अपने घर, छलके उनके दिल से प्यार।।
बड़े प्यार से बहने अपने भैया को सभी बांधती राखी।
भाव विभोर दौड़ कर आती सब सोन चिड़िया पाखी।।
भाई भी अपनी बहनों को जीवन भर वचन रक्षा का देते है।
देते है उपहार बहिन को, उसके सारे संकट अपने सिर लेते है।
युगों युगों से यह रीत चली है भाई बहिन का पावन त्योहार।
श्रावण मास में नेह छलकता,बरसे सावन की सरस फुहार।।
सोनी बरनवाल “कशिश”
जमुई, बिहार











