
कविता
रविवारीय प्रतियोगिता हेतु कविता
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विषय –
मेरी भाषा मेरा अभिमान
मधुर ध्वनि से गीत कोई गुंजन करता है,
जब जब मन गीतों में सुंदर रस भरता है,
चुन चुन कर शब्दों से कवि जब
कोई गीत रचता है ,
सुंदर सुंदर पंक्तियों से सृजन कर नई प्रीति रचता है ,
स्वर व्यंजन
से सभी को शिक्षित करना जाने,
अनजाने लोगों में भी दीप ज्ञान का जलाता है कोई ,
जब जब सभा में प्रस्तुती देता है तो अखंड ज्योति शिक्षा की जलाता है कोई ,
हिंदी हि मेरी पहचान
मेरी भाषा मेरा अभिमान है
राष्ट्रीयता के रंग बिरंगे फुल खिलाता है कोई,
गढ़ के अक्षर हृदय में प्रेम जगाता है कोई
मेरी रचनाएं मेरी
विरासत है,
सरस्वती कलम में हीं विराजत है,
राष्ट्र प्रेम मेरा स्वाभिमान है,
मेरी भाषा मेरा अभिमान है
अशोक सुमन भवानी मंडी (राज.)











