
दिनांक : 30 अगस्त , 2026
विधा : कविता
मेरी भाषा मेरा अभिमान ,
तिरंगा जिसका पहचान ।
क्यूॅं न मैं इसपे इठलाऊॅं ,
और कहूॅं मैं सीना तान ।।
अहो भाग्य प्राप्त हमारा ,
परम प्रतापी भी ये भूमि ।
सृष्टि की भी कृपा विशेष ,
साधु तपसी देवी चूमि ।।
शारदा लक्ष्मी विराजित ,
राम कृष्ण अवतार जहाॅं ।
बुद्ध महावीर व विवेका ,
उपदेश दिए प्यार जहाॅं ।।
नाज हमारा उस भाषा पे ,
जो कहलाता देववाणी ।
बड़ी सरल मृदुल है भाषा ,
जन जन हेतु कल्याणी ।।
अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )
बिहार ।











