
विधा… कविता
खुशियों की कीमत उन माता-पिता से पूछिये, जिन्होंने एक संतान को जन्म दिया हो।
यह खुशी उनके लिये अनमोल है, जिस खुशी का कभी ना लेते वह मोल हैं।
संतान को खुश रखने के लिये, उन्हें कई कीमत चुकानी पड़ती है।
अपना दुख -दर्द, भूख -प्यास यहाँ तक कि अपनी, जवानी भी भुलानी पड़ती है।
पर कई संताने पता नहीं क्यों क्रूर हो जाते हैं, और अपने माता -पिता को सहारा देना भूल जाते हैं।
जिन माता -पिता
ने खुद को न्योछावर कर दिया उनकी खुशी के लिये,
उन सन्तानो ने माता -पिता को छोड़ दिया अपनी खुशी के लिये।
खुशियों कि कीमत तो तब समझ में आती है,
जब वह उनके साथ नहीं होते।
वे उनकी याद में बिलकते और रोते, क्योंकि माता -पिता कभी अपनी खुशयों की कीमत नहीं मांगते।
पर तब तक उनसे बहुत कुछ लूट जाता है,
माँ का आँचल और पिता का साया उनसे उठ जाता है।
तो आओ साथियों हम उनकी खुशियों की कीमत को पहचाने।।
पूर्णपावन कृति
सरायपाली छत्तीसगढ़











