
तेरे संग चाय की चुस्की,
सावन की फुहार लगे,
खामोशी भी गीत सुनाए,
हर पल कुछ खास लगे।
खिड़की पर बूंदें ठहरें,
हाथों में प्याला रहे,
तेरी बातों की गर्माहट से,
मन भी अपना-सा रहे।
अदरक वाली चाय की खुशबू,
यादों को महका जाए,
एक चुस्की बीते कल की,
एक चुस्की आज बना जाए।
न कोई जल्दी, न कोई मंज़िल,
बस यूँ ही शाम ढलती रहे,
चाय खत्म हो जाए चाहे,
बातों की मिठास चलती रहे।
तेरे संग चाय की चुस्की,
सच कहूँ तो कमाल है—
छोटा-सा ये प्याला जैसे,
पूरी दुनिया का सुकून संभाला है।
पूनम कुमारी (शिक्षिका )
स्नातकोत्तर (हिन्दी )
मधुबनी बिहार











