
(ध्यान ज्ञान और कर्म का संगम)(1)
हे अर्जुन आजा तुझे दिखा दूं मैं अपना रूप कायानात सा
भय न करना तुम न डरना देखकर रूप मेरा कायानात सा
हे अर्जुन आजा तुझे दिखा दूं मैं अपना रूप कायानात सा
भय न करना तुम न डरना देखकर रूप मेरा कायानात सा
मैं ही धर्मों में धर्मात्मा हूँ और मैं ही हूँ दिन रात सा
मैं ही हूँ ज्ञानि अज्ञानी और मैं ही हूँ छोटी बात सा
सोचना न तूं विचार न तूं देखकर रूप मेरा धूप सा
हे अर्जुन आजा तुझे दिखा दूं मैं अपना रूप कायानात सा
मैं हीं हूँ श्री सर सागर में और मैं ही हूँ श्री हरि विष्णु सा,
मैं ही हूँ हिमालय पर्वत और मैं ही हूँ देवों में महादेव सा
मैं ही नर हूँ और नारयण और मैं ही हूँ आदिनाथ सा
हे अर्जुन आजा तुझे दिखा दूं मैं अपना रूप कायानात सा
मेरा रूप अनेक है अर्जुन और अनेकों में भी एक है
जिस रूप में तुम मुझकों देखोगे वही ही मेरा रूप है
देवों में सब देव हूँ मैं और मैं ही हूँ स्वर्ग पाताल सा
हे अर्जुन आजा तुझे दिखा दूं मैं अपना रूप कायानात सा
मैं हीं हूँ आंधी तूफान और मैं ही हूँ विनाशकारी,
मेरे अतिरिक्त अन्य कोई नहीं है मैं ही हूँ प्रलयकारी
हे अर्जुन मुझमें तुम विश्वास करों क्योंकि मैं हूँ विश्वास सा
चन्दे पासवान उर्फ अलबेला जी मधुबनी बिहार से,











