
उर का मिटता है तमस,शिक्षक स्वयं प्रकाश।
सीख मानता शिष्य जो, वह छूता आकाश।
श्रेष्ठ विचारक यह सदा, मेधा के प्रतिमान,
जो जाता इनकी शरण,हो कुबुद्धि का नाश।।
कर्मभूमि रचते सदा,देकर के प्रतिदान।
ज्ञान पुंज की खान हैं,लाते नवल विहान।
निर्धारक बन लक्ष्य के, दिखलाते शुचि मार्ग,
ज्ञान पिपासा शांत कर, पूर्ण करें अरमान।।
पूर्ण करें उर आस जो,रचते नव्य विधान।
भरे ज्ञान का कोष हैं,करें दिव्यता दान।
शिक्षा शिक्षक से मिले, मात पिता से नाम।
सदा नमन गीता करें,तीनों श्रेष्ठ महान।।
प्राप्त करो शिक्षा सभी,ज्ञान दिव्य वरदान।
शिक्षक का करिए सदा, मान और सम्मान।
देते शिष्य सँवार ये,देकर शुभ संस्कार,
शिक्षा देती है हमें,जग में नव पहचान।।
डॉ गीता पाण्डेय अपराजिता
सलोन रायबरेली उत्तर प्रदेश











