
प्रथम गुरू पितु मातु हमारे,
राह दिखाकर दिये सहारे,
उनके बिन आधार न होता,
मानुष का संसार न होता,
जीवन पर अभिमान न होता,
सही-गलत का ज्ञान न होता,
यदि वो हमको जन्म न देते,
आज हमारा नाम न होता,
प्रथम नमन माँ पिता हमारे,
दूजा शिक्षक गण को सारे,
विधालय में शिक्षा देकर,
ज्ञान चक्षु विकसित कर डारे ।
के वी











