
नंद के घर आइन हें कन्हैया,
आज यशोदा मैया ले थे बलैया,
गोकुल में सब्बो झन खुशियाँ मनाएँ,
गोकुल में आज देखव कन्हैया घर आइन हें।
सृष्टि ला रचे हे हमर कन्हैया,
कथन हमन माखचोर कन्हैया,
यमुना के तीर में बंसी बजाथे,
ग्वाल बाल संगी संग गैया चराथे।
राधा के संग रास रचाईन,
रास में देखव हमर शंकर जी भी आइन,
सृष्टि के रचयिता देखव नाच नचाथे,
पाप ला मिटाए बर सुदर्शन भी चलाथे।
कल्कि बनके आहीं कलियुग में कन्हैया,
पाप ला ख़तम करे बर बन जाहीं खेवईया,
भवसागर ले हम सब तर जाबो,
जय जय कहके हम सब गाबो।
राधे राधे कहके बुलाव,
फिर आहीं देखव हमरे कन्हैया,
नंद के घर आइन हें कन्हैया,
आज यशोदा मैया ले थे बलैया।।
जय श्री कृष्ण, जय श्री राधे
स्वरचित
पूर्णपावन कृति
सराईपाली छत्तीसगढ़











