
सामने खड़ा इंसान दिखाई नही देता बनाने वाला जहान देखना वो चाहते है!
इतने बड़े वो हो गए निकालने लगे खामियाँ
सच मे खुद को खुदा देखना वो चाहते है!!
बनाई उसकी दुनियाँ को लगे सब बिगाड़ने कैसे अदा वे कार देखना वो चाहते है!
जुल्म और जुर्म बना उनका खिलौना और कायदों के किरदार देखना वो चाहते है!!
मासूमियत के चौले और मसखरी के नकाब
कैसे वो फनकार देखना वो चाहते है!
अजीब से मसौदे अजीब से ही मकसद
शोहरत के दीवाने देखना वो चाहते है!!
बेचना प्यादा वजीर जमीं हो या जमीर कैसा सजा बाज़ार देखना वो चाहते है!
जिस्म सब खुला और रूह जिस्त नदारद ऐसा इंसाफ देखना वो चाहते है!!
समेट ‘सरल’ दुकान फूल पंखुड़ियों वाली कांटो का व्यापार देखना वो चाहते है!
तितली के काट पंख और लगा कर चोंच गिद्ध की सी उड़ान क्या ही आप देखना वो चाहते है!!
संदीप शर्मा सरल!!
देहरादून उत्तराखंड !!











