
पंछी फूलों तितली तक का जिक्र हुआ
कैसे कहूं कि किस किस का था जिक्र हुआ।
होना चाहिए था जिसका कि फिक्र बहुत
उन बातो का न तो कोई था जिक्र हुआ!!
हालात बदलने को लाए थे सरकार मगर
किन हालातो को बदला न था जिक्र हुआ।
मोहब्बत की भी बाते थी तो बहुत हुई पर मोहब्बत के मारो का न था जिक्र हुआ!!
इल्म रहा ही नही दर्द के मारों का बिमारों
के था रोग का जब था जिक्र हुआ !!
संदीप शर्मा सरल!!
देहरादून उत्तराखंड !!












