
ममता में मूरत है जिनकी, अवगुण सभी मिटाती हैं।
नष्ट विकार हृदय का करती, पावन पुण्य जगाती हैं।
जिस पर कृपा मातु की बरसे, रिद्धि सिद्धि सब उसे मिले,
सदा भक्त को जग में मैया, अपने अंक लगाती हैं।।
शक्तिपीठ इक्यावन जग में, मांँ का रूप निराला है।
नव रूप सुशोभित भक्तों में, हर्षित करने वाला है।
अपरम्पार मातु की महिमा, भक्त सभी गुणगान करें,
चरणों में शीश झुकाकर वो, पिएँ भक्ति की हाला है।।
मांँ की सूरत प्यारी लगती,सुख से झोली नित्य भरे।
अतुलित सुख नैनो को मिलता, सुमिरन जो भी भक्त करे।
संकट उसका सारा हरती, जो भी दर पर आता है, ममता का सागर भरा हुआ, उर से प्रीति अपार झरे।।
जाति धर्म का भेद भुला कर,मांँ का हम मान बढ़ाएँ।
मांँ के आंँचल की छाया में, जीवन को सफल बनाएंँ।
आशीर्वाद मिले मैया का, उन्नति के नित द्वार खुलें,
निशिवासर शुचि नाम भजें हम,मन का भ्रम दूर भगाएंँ।।
डॉ गीता पांडेय अपराजिता
सलोन रायबरेली उत्तर प्रदेश












