
हे भारत माँ! तेरी माटी, माथे का अभिमान है,
तेरे चरणों में अर्पित मेरा तन, मन और प्राण है।
तेरी गोद में जन्म मिला, तुझसे जीवन पाया,
तेरे गौरव की रक्षा करना, हमने धर्म बनाया।
तेरी धूल भी चंदन जैसी, तेरा कण-कण पूज्य है,
तेरे हित में जो मिट जाए, उसका जीवन धन्य है।
हिमालय तेरी शान बने, सागर तेरे चरण पखारे,
तेरी जय के गीत गूँजें, नभ में चाँद-सितारे।
जिन वीरों ने हँसकर अपना सर्वस्व लुटाया था,
माँ की पावन आन के लिए शीश चढ़ाया था।
उनकी गाथा आज भी हमको राह दिखाती है,
भारत माँ की जय बोलो—धड़कन कहती जाती है।
सीमा पर प्रहरी बनकर जो जाग रहे दिन-रात,
उनके साहस से सुरक्षित है माँ की हर सौगात।
उनके त्याग को नमन हमारा, उनका ऊँचा मान,
उनके कारण गर्वित भारत, गौरवमय हिंदुस्तान।
जाति-धर्म के भेद भुलाकर, एक तिरंगा थामें,
भारत माँ की संतानों का एक बने हर नाम।
भाषाएँ चाहे अलग-अलग हों, दिल में देश समान,
एकता की शक्ति से जग में ऊँचा रहे निशान।
नहीं चाहिए स्वर्ण-मुकुट, न वैभव का श्रृंगार,
माँ! तेरी सेवा में बीते जीवन का हर पल-वार।
जब तक साँसें चलती रहें, तेरा गुणगान करें,
तेरी मिट्टी का मान बढ़ाएँ, तेरा सम्मान करें।
तेरे खेतों में हरियाली हो, हर घर में मुस्कान,
ज्ञान, शांति और श्रम से बढ़े अपना हिंदुस्तान।
विश्व-पटल पर सदा चमकता रहे तेरा नाम,
हे भारत माँ! स्वीकार करो, शत-शत मेरा प्रणाम।
वंदन तुझको, अभिनंदन तुझको,
हे माँ भारती महान!
तेरी जय-जयकार रहे,
ऊँचा रहे तिरंगा और ऊँचा रहे हिंदुस्तान!
डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार











