
महीने का बजट,नही बनाता हूं अब
मन बहुत बैचेनी मे रहता है,मेरा अब
बजट देखते ही ,मन विचलित है होता
बेवजह की घर मे सबो से,खिजलाहट है होता ।
सबकुछ छोड़ रखा हूं, दैनिक आय मे अब
व्यय करना है ,आय होगी हमे जब
भले जरूरत हो बहुत ज्यादा पास मे
पूरी ना कर पाने से ,रहे मन उदास मे।
कष्ट उठायेगे,मुसीबत मे रहेगे,ठीक है सब
लेकिन महीने का बजट बनायेगे नही,अब
बजट बनाते ही ,बोझ बढता है परेशानी का
फिर तो मन उदासी मे रहते है,पूरे महीना का ।
चुन्नू साहा पाकूड झारखण्ड











