
एक बार शनिदेव सुनो तुम,फिर संघार दुष्ट कर डालो।
भयमुक्त समाज करो अब तो,संतति अपनी सब पालो।
यही कामना लेकर गीता,द्वार तुम्हारे है आई,
मझधार फँसी जग में नइया,आकर प्रभुवर इसे निकालो।।
छाया नंदन न्याय देवता, महिमा जिनकी अतिशय न्यारी।
पाप रोकते हैं इस जग में,दंड दुष्ट को देते भारी।
जो भी शनि को निशदिन ध्याता,सदा कृपा उस पर बरसाते,
साध्य सिद्धि बीजों को बोते, राज सृष्टि हैं करते सारी।।
धर्म-कर्म जो जग में करता,उसके शनि देव सहायक हैं।
न्याय देवता करुणा सागर,शुभदा के प्रभु फलदायक हैं।
बलवान जगत में जो बनकर,निर्धन पर करता राज रहे,
एक दिवस उनके कष्टों का,करते शनिदेव निवारक हैं।।
दर्पण टुकड़े-टुकड़े होकर, वह छोड़े नहीं स्वभाव कभी।
सत्य बात सदैव ही कहता, नहीं बदलता बर्ताव कभी।
दर्पण से ही सीख सभी लो, चाहे जैसी बने परिस्थिति,
सुख-दुख में समभाव रहे सब, प्रभु के प्रति नहीं दुराव कभी।।
डॉ गीता पांडेय अपराजिता
सलोन रायबरेली उत्तर प्रदेश











