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हिंदी भाषा,भारत माता

इंद्र धनुष का मुकुट पहनतीं, स्वर्ण आभा गज़ब समाही,

अक्षर अक्षर मणी रत्न जड़ित श्री भारत माता छबी अजब हृदय में तुम भायी,

गिरिराज सी अडिग,
सींह की करती तुम सवारी,

श्वेत कमल आसीत,
ध्वल सारी में तुम शोभीत,
हिंदी भाषा मुख में उपजती
मात्र भाषा
बन तुम हो छाई,

मंद मंद मुस्कान तुम्हारे अधरन पर,
रंग बिरंगी कुसुम सुमन से, उपवनों में सौरभ सलिल सुगंध हर ओर समायी,

एक हाथ वेदों से शोभित है, एक हाथ कलम लेखनी ,
रचनाकार सी माई,

कथनी करनी में अंतर नहीं कोई आखर कलश लेकर हाथों में सजता ,
उर हृदय में
समंदर सी गहराई,

मेरी भारत माता, हिंदी भाषा की जननी
अनंत काल से अविनाशी तुम
आत्मा हरि मह तुम समाही ,

हिंदी धरती की शोभा तुम,
संस्कृति को धारण करती तुम,
संस्कृत भाषा से प्रकट हुई तुम
हिंदी सुगंध सी पुरवाई।।

अशोक कुमार सुमन भवानी मंडी (राज.)

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