
आलेख : निराशा अंधकार है, आशा प्रकाश। जिस प्रकार अंधकार में व्यक्ति को अपना ही हाथ नहीं सूझता, उसी प्रकार निराशा में डूबे व्यक्ति को अपना भविष्य नहीं सूझता। निराशा सच में हमारे जीवन के लिए अभिशाप है।
निराशा क्या है? निराशा असफलता से नहीं, बल्कि असफलता को अंतिम सत्य मान लेने से जन्म लेती है। एक-दो बार हारने पर यह सोचना कि “अब कुछ नहीं हो सकता”, यही निराशा है। यह एक मानसिक रोग है जो धीरे-धीरे हमारे आत्मविश्वास, संबंधों और स्वास्थ्य को खा जाता है।
निराशा अभिशाप क्यों है? यह पहले हमारे कर्म को रोक देती है। गीता कहती है – कर्म करो। निराश व्यक्ति कर्म करना ही छोड़ देता है। वह सोचता है – “क्या फायदा कोशिश करके?” किसान यदि एक बार फसल खराब होने पर निराश होकर खेती छोड़ दे, तो भूखा मर जाएगा। निराशा हमें प्रयास करने से पहले ही हरा देती है। यह परस्पर हमारे संबंधों को तोड़ती है। निराश व्यक्ति हर समय रोता है, शिकायत करता है। धीरे-धीरे लोग उससे दूर होने लगते हैं। परिवार में भी वह बोझ लगने लगता है। वह अकेला पड़ जाता है, और अकेलापन और अधिक निराशा लाता है। यह शरीर को बीमार करती है। आज विज्ञान भी मानता है कि निराशा से ब्लड प्रेशर, नींद न आना, थकान और अवसाद जैसी बीमारियाँ पैदा होती हैं। मन हारा तो शरीर भी हार जाता है। यह हमारे अवसरों को अंधा बना देती है। आशावादी को हर संकट में एक अवसर दिखता है, पर निराशावादी को हर अवसर में एक संकट। रास्ते में पत्थर है तो निराश व्यक्ति बैठ जाएगा, आशावादी उसी पत्थर पर बैठकर रास्ता सोचेगा। इतिहास से सीखकर आगे बढना चाहिए। थॉमस एडिसन 1000 बार फेल हुए, फिर बल्ब बनाया। यदि वे निराश हो जाते तो आज दुनिया अंधेरे में होती। हमको हर समय कोई भी कार्य छोटी जीत से शुरू करना चाहिए। बड़ा लक्ष्य निराश करता है। दिन का छोटा लक्ष्य बनाएं और उसे पूरा करें। आत्मविश्वास लौटेगा। अच्छे लोगों के साथ प्रेम से मिलकर रहें। जैसे धुएँ में रहने से कपड़े काले होते हैं, वैसे ही निराश लोगों के साथ रहने से मन काला होता है। प्रेरणादायक किताबें पढ़ें, सकारात्मक लोगों से मिलें। हमें सदैव कर्म पर ध्यान देंना चाहिए। परिणाम हमारे हाथ में नहीं, प्रयास हमारे हाथ में है।
निष्कर्ष: जीवन में दुःख आएंगे, असफलता भी आएगी। यह प्रकृति का नियम है। पर निराशा को घर में जगह देना, अपने ही घर में आग लगाने जैसा है। आशा रखिए। याद रखिए – रात कितनी भी लंबी हो, सुबह जरूर होती है।
मुन्ना राम मेघवाल।
कोलिया,डीडवाना,राजस्थान।











