
समय के फल नहीं भूले।
ख़ुशी के पल नहीं भूले।
समझदारी रखी हमने,
जो बीते कल नहीं भूले।
पहुँच कर इस ऊंचाई तक,
ज़मीनी तल नहीं भूले।
भरोसे की रिवायत में,
मिले जो छल नहीं भूले।
सभी मुश्किल सवालों के,
वो बूझे हल नहीं भूले।
किसी चुपचाप चेहरे पर,
वो उभरे सल नहीं भूले।
*नवीन माथुर पंचोली
अमझेरा धार मप्र











