
शीर्षक – वक्रतुंड आए मेरे द्वार
वक्रतुंड आए मेरे द्वार,लेकर मंगल की बहार।
गूँजे जय-जय गणपति नाम,रोशन हो मेरा संसार।
सिंदूर सजे तेरे अंग पर,चंदन दमके भाल,
मंद-मंद मुस्कान तुम्हारी,मोहे प्रभु हर बार।
दूर्वा, फूल और मोदक लेकर,तेरी पूजा करूँ अपार,
तेरी कृपा से खिल उठे प्रभु,मेरे मन का संसार।
तू बुद्धि का दीप जलाए,तू अज्ञान मिटाए,
भटके पथिक को राह दिखाकर सच्ची दिशा बताए।
जब भी मन में संशय जागे,तेरा नाम पुकारूँ,
वक्रतुंड हे विघ्नहर्ता,चरणों में शीश निहारूँ।
वक्रतुंड आए मेरे द्वार,लेकर मंगल की बहार।
गूँजे जय-जय गणपति नाम,रोशन हो मेरा संसार।
ऋद्धि-सिद्धि संग शोभित हो तुम,मंगलमूर्ति प्यारे,
तेरी छाया मिल जाए तो,दूर हों दुःख सारे।
मेरी हर साँस तुझे पुकारे,हर धड़कन तेरा नाम,
वक्रतुंड गणराया मेरे,तू ही मेरा धाम।
आओ बप्पा प्रेम से आओ,मन-मंदिर सज जाए,
तेरे चरणों की धूल मिले तो,जीवन धन्य हो जाए।
हाथ उठाकर आज पुकारें,
गूँजे चारों ओर,
वक्रतुंड गणपति महाराज,
कर दो सबका मंगल-भोर!
रीना पटले शिक्षिका
जिला-सिवनी मध्यप्रदेश











