
वक्रतुंड गजवदन प्रभु, मंगलमय वरदाय।
भक्तों के संकट हरें, सुख-समृद्धि बरसाय॥
माता गौरी के सुत प्रिय, शिवनंदन गुणधाम।
रिद्धि-सिद्धि के नाथ हैं, जग में जिनका नाम॥
प्रथम पूज्य गणराज तुम, विघ्नों के संहार।
तेरी कृपा से हो सदा, जीवन का उद्धार॥
मोदक प्रिय, करुणा-निधि, दीनों के रखवार।
भक्ति-भाव से जो झुके, भर दो उसके द्वार॥
ज्ञान-बुद्धि के देव हो, देते शुभ उपदेश।
तेरे चरणों में मिले, जीवन को नव वेश॥
गणपति बप्पा आज फिर, आए लेकर प्यार।
हर्षित होकर गा उठे, सारा यह संसार॥
मंगल दीपक जल उठें, गूँजे जय-जयकार।
सुमन करे विनती प्रभो, रखना कृपा अपार॥
गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएँ।
— पूर्णिमा सुमन











