
हे बाल गणपति भालचंद्र बुद्धिनाथ
हे धूम्रवर्ण देव, हे दीनानाथ
एकाक्षर एकदंत तुम हो निराले संत
देते हो देव रिद्धि सिद्धि सबको असुरों का करते अंत
गजकर्ण गजानन गज वक्र गजवक्त्र गणाध्यक्ष
भारी भरकम रखते हो तुम वक्ष
गणपति गौरीसुत लम्बकर्ण लम्बोदर
महाबल महागणपति हो तुम ही महेश्वर
मंगलमूर्ति मूषक वाहन निदिश्वरम
प्रथमेश्वर
शुपकर्ण शुभम सिद्धि दाता सिद्धिविनायक ईश्वर
सुरेश्वरम वक्रतुंडअखूरथ अमित
अनंत चिदरूपम
अवनीश अविध्न भीम भूपति भवनपति स्वरूपम
-डॉ. राजेश पुरोहित











