
हम सब अपने घर मिट्टी के गणेश ही लाए |
ताकि पर्यावरण की सुरक्षा हम कर पाए |
नदी में न विसर्जित कर,
अपने घर के बगीचे में ही उन्हें विसर्जित कराए |
इस बात पर अमल हम खुद करें |
और लोगों को भी यही समझाए |
ताकि उन्हें कुछ दिनों के मेहमान नही,
हर पल अपने बीच हम पाए |
जब लोग है विसर्जन के लिए जाते |
अक्सर हम कई दुर्घटनाओं की खबर,
दूसरे दिन समाचार पत्रों में है पाते |
क्यों न हम एक नियम बनाए |
हम सब अपने घर मिट्टी के गणेश ही लाए |
बड़ी नही छोटी सी मूर्ति ही हम घर-घर बैठाए |
उनका विसर्जन आसानी से सभी कर पाए |
नदियों का पानी दूषित होने से हम सभी बचाएं |
ताकि पर्यावरण की सुरक्षा हम कर पाए |
हम सब अपने घर मिट्टी के ही गणेश लाए ||
स्वरचित
मंजू अशोक राजाभोज
भंडारा (महाराष्ट्र)













